सरस्वती वन्दना-श्रीमती मंजुलता

 📝प्राथमिक शिक्षकों की अपनी साहित्यशाला,  हिम मन मन्थन में  प्रस्तुत है, आज जनपद- चमोली गढ़वाल से शिक्षिका बहिन श्रीमती मंजुलता जी द्वारा रचित कविता-:


🙏🏾🕉️🙏🏾✍️सरस्वती वन्दना 


मांँ सरस्वति, मांँ भगवति,

तेरा चरणों मा नमन करदा।

मांँ सरस्वति, मांँ भगवति,

नमन करदा, हम शीश झुकौंदा।।


हे! मेरी माता दुर्गा शक्ति,

हम सब करदा तेरी भक्ति।

तेरा चरणों मा नमन करदा,

नमन करदा, हम शीश झुकौंदा।।


मांँ सरस्वति, मांँ भगवति,

तेरा चरणों मा नमन करदा।

नमन करदा, हम शीश झुकौंदा,

शीश झुकौंदा नमन करदा।।



हे मेरी माता ज्ञान स्वरूपिणी,

ज्ञान की देवी ज्ञान दे दे।

हंस वाहिनी तू छै माता,

तेरा चरणों मा नमन करदा।।



मांँ सरस्वति, मांँ भगवति 

तेरा चरणों नमन करदा।

मांँ सरस्वति, मांँ भगवति,

नमन करदा, हम शीश झुकौंदा।।


हे मेरी माता शक्ति रूपिणी,

एक हाथ माता पुस्तक धारिणी।

द्वि हाथ माता वीणा सजौंदी,

हे मेरी माता वीणा धारिणी।।


मांँ सरस्वति, मांँ भगवति,

तेरा चरणों मा नमन करदा।

मांँ सरस्वति, मांँ भगवति,

नमन करदा, हम शीश झुकौंदा।।




  ✍️रचना-

मंजुलता (स०अ०)

रा० क० उ० प्रा० वि० बौंला 

वि० ख०- कर्णप्रयाग, चमोली



🙏संकलन- टीम हिम मन मन्थन उत्तराखण्ड

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