नारी का अस्तित्व - श्रीमती अमिता कालरा

 📝प्राथमिक शिक्षकों की अपनी साहित्यशाला,  हिम मन मन्थन में नारी के अस्तित्व को बताते हुए प्रस्तुत है,  आज जनपद- रुद्रप्रयाग गढ़वाल से शिक्षिका बहिन श्रीमती अमिता कालरा जी द्वारा रचित कविता-:


🙏✍️नारी का अस्तित्व 


नारी है वेदों की अमर वाणी,

सृष्टि की आराध्या, जीवन की कहानी।

उसकी कोख में पलता है संसार,

उसके बिना अधूरा है हर आकार।।


वो देह नहीं आत्मा का प्रकाश है,

धरती पर ईश्वर का अनुपम प्रयास है।

ममता की गंगा, साहस की गगनचुम्बी शिखर,

वो आँसुओं में भी स्वयं जाती है निखर।।


वो सीता की करुणा, द्रौपदी की पुकार,

वो दुर्गा की शक्ति, सरस्वती का सार।

नारी त्याग है, नारी श्रेष्ठ कृति है,

नारी ही तपस्या, नारी ही संस्कृति है।।


कभी उसे वस्तु समझ ठुकरा दिया,

कभी आँसुओं को खेल बना  दिया।

कभी झूठे प्रेम से उसे बहलाया गया,

फिर अकेला छोड़ कर भुलाया गया।।


वो हर चोट को शक्ति में ढाल लेती है,

अन्धेरों में भी अस्तित्व की मशाल जला लेती है।

उसकी दृष्टि में है स्नेह का सागर,

पर उसके क्रोध से काँपे अत्याचारी नागर।।


वो आँचल में शीतल छाँव भी लाती है,

तो रणभूमि में प्रलय की गूँज सुनाती है।

वो आरती की ज्योति, वो रण का बिगुल,

नारी है जीवन का अमर अनुशासन मूल।।



नारी कोमल है, पर निर्बल नहीं,

उसकी गरिमा घटे, यह सम्भव नहीं।

उसके त्याग से उज्ज्वल होता है द्वार,

उसकी वीरता से दमके इतिहास अपार।।


वो साधना है, शक्ति है, प्रेरणा महान,

नारी ही है जग का सच्चा सम्मान।

नारी है अद्भुत, नारी है अलंकार,

उसके बिना सूना है सारा संसार।।


वो सुरभि है, जीवन में रंग भरती है,

वो ज्वाला है, अन्याय जो भस्म करती है।

नारी ही संस्कृति, नारी ही मान,

नारी है धरती का सबसे बड़ा सम्मान।।


🙏रचना-

अमिता कालरा (प्र०अ०)

रा० प्रा० वि० मुन्नादेवल

वि० ख०- जखोली, रुद्रप्रयाग



🙏संकलन- टीम हिम मन मन्थन उत्तराखण्ड

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