लोक पर्व आठों- श्री गोविन्द बल्लभ भट्ट

 📝प्राथमिक शिक्षकों की अपनी साहित्यशाला,  हिम मन मन्थन में श्री नन्दाष्टमी एवं लोक पर्व "आठों" पावन पर्व पर प्रस्तुत है, आज जनपद- पिथौरागढ़ से शिक्षक साथी श्री गोविन्द बल्लभ भट्ट जी द्वारा रचित कविता-:


🙏✍️लोक पर्व यह आठों है


लोक पर्व यह आठों है,

खुशियाँ लाता हजारों है।

नए नए परिधानों में सजे,

बाल, वृद्ध और नारी है।

लोक पर्व यह आठों है।।


कुमाऊँ, नेपाल के पश्चिमी अँचल में,

दुर्गाष्टमी मनायी जाती है।

भाद्रपद मास की अमुक्ताभरण,

सप्तमी को गौरा माँ आती है।

लोक पर्व यह आठों है।।



दूर्वाष्टमी के पावन दिन,

शिव गौरा मिलन होता है।

झोड़ा, चाँचरी गीत गाकर,

आठों खाला में उत्सव होता है,

लोक पर्व यह आठों है।।


युवा बाल सब मिलकर,

नंदी, भृंगी का स्वाँग रचाते हैं।

पशुपति नाथ के स्वागत में,

हिरण, चीतल भी यहाँ बनाते हैँ।

लोक पर्व यह आठों है।।


अनेक फल और फूल,

गौरा महेश्वर को चढ़ाये जाते हैं।

चादर से उछाल, गगन को,

लोगों को प्रसाद रूप में देते हैं।

लोक पर्व यह आठों है।।


चातुर्मास में भीगे बदन में,

बिच्छू घास लगाते हैं।

रोग व्याधि हरे, हर तन से,

शिव गौरा का आशीष पाते हैं।

लोक पर्व यह आठों हैं।।


🙏रचना-:

गोविन्द बल्लभ भट्ट (प्र०अ०)

रा० आ० प्रा० वि०अजेड़ा, 

वि० ख०- डीडीहाट (पिथौरागढ़ )


🙏संकलन- टीम हिम मन मन्थन उत्तराखण्ड

टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

होली - श्रीमती सुशीला थपलियाल

माँ तुम - श्रीमती वन्दना जोशी

गौचर मेला-श्री सरोज डिमरी