राखी का त्योहार- श्रीमती सरोज डिमरी
📝प्राथमिक शिक्षकों की अपनी साहित्यशाला, हिम मन मन्थन में "रक्षाबन्धन" पावन पर्व के परिप्रेक्ष्य में प्रस्तुत है, आज जनपद- चमोली गढ़वाल से शिक्षिका बहिन श्रीमती सरोज डिमरी जी द्वारा रचित कविता-:
🙏 ✍️ राखी का त्योहार
राखी का त्योहार है,
सावन की फुहार है।
हम बच्चों ने फूल बनाए,
राखी का त्योहार है।।
विद्यालय का आंँगन है,
हम मित्रों का दामन है।
सुन्दर मन के चित्र बनाए,
भीगता हुआ यह सावन है।।
हमने राखी को सजाया,
मोती धागों से इसे बनाया।
बाजारों में इसकी धूम है,
ऑनलाइन इसे मंँगाया।।
रोली, चन्दन और सजी मिठाई,
खुश हो झूमें बहिन-भाई।
बहन ने टीका लगाया,
भाई ने दी नजर उतराई।।
बुआ हमारी आयी है,
खेल-खिलौने लायी है।
खुश होकर के हम झूमते,
ये दिन बड़े सुखदायी हैं।।
छक-कर खीर खिलाएंँगे,
बुआ जी के संग गाएंँगे।
पास-पड़ोस में जाएंँगे,
खूब मिठाई बाॅंटेंगे।।
सुन्दर-सुन्दर चित्र बनाकर,
राखी का पर्व मनाएंँगे।
सपनों का संसार हमारा,
हम रक्षाबन्धन मनाएंँगे।।
🙏रचना-:
सरोज डिमरी (स० अ०)
रा० उ० प्रा० वि० घतोड़ा,
वि०ख०- कर्णप्रयाग, चमोली
🙏संकलन- टीम हिम मन मन्थन उत्तराखण्ड


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