गुरु महिमा- श्री मनोज घिल्डि़याल
📝प्राथमिक शिक्षकों की अपनी साहित्यशाला हिम मन मन्थन" में शिक्षक दिवस पावन पर्व पर प्रस्तुत है, आज जनपद पौड़ी गढ़वाल से शिक्षक साथी श्री मनोज घिल्डि़याल जी द्वारा रचित कविता-:
🙏🏾🕉️🙏🏾✍️गुरु महिमा
गुरु वशिष्ठ की तपस्थली पहुंँचकर,
विद्यार्जन किया पद शीश रखकर।
जीव जगत के क्लेश मिटाकर,
मर्यादा पुरुषोत्तम राम कहलाए।।
गुरु सांदीपन के आश्रम रहकर,
ज्ञानार्जन किया श्रम से तपकर।
लोक कष्ट हरे पापियों का नाशकर,
श्रीकृष्ण भगवान कहलाए।।
गुरु द्रोणाचार्य की छत्र छाया धरकर,
धनुर्विद्या में पारंगत बनकर।
विपक्षियों को धूल चटाकर,
अर्जुन महान धनुर्धर कहलाए।।
गुरु रामकृष्ण की कृपा माथ धर,
धर्म आध्यात्म की दीक्षा धारणकर।
हिन्दू धर्म का परचम फहराकर,
स्वामी विवेकानन्द कहलाए।।
गुरु आचरेकर की दीक्षा से मथकर,
सचिन ने कठोर श्रम तपकर,
विपक्षियों के छक्के छुड़ाकर,
क्रिकेट देवता तेंदुलकर कहलाए।।
गुरु महिमा को जान ले यदि नर,
सरल हो जाय लक्ष्य प्राप्ति डगर।
इसीलिए ज्ञानीजन कहें ध्यान धरकर,
कुछ भी नहीं है गुरुकृपा से बढ़कर।।
✍️रचना-:
मनोज घिल्डियाल
(सहायक अध्यापक)
रा० प्रा० वि० गाडियूंँ
प्रखण्ड- रिखणीखाल, पौड़ी गढ़वाल
*🙏संकलन- टीम हिम मन मन्थन उत्तराखण्ड*
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