मैं एक छोटा बच्चा हूँ-श्रीमती भावना पाण्डेय

 📝प्राथमिक शिक्षकों की अपनी साहित्यशाला हिम मन मन्थन में  प्रस्तुत है, आज जनपद नैनीताल से शिक्षिक बहिन श्रीमती भावना पाण्डेय जी द्वारा रचित  कविता-:


✍️मैं एक छोटा बच्चा हूंँ


मैं जब छोटा बच्चा था,

बड़ी शरारत करता था।

लगता मुझको अच्छा था,

पर सबको गुस्सा आता था।।


फिर मैं गया स्कूल,

शरारत करना गया भूल।

मेरी टीचर अच्छी थी,

बहुत प्यार से पढ़ाती थी।।


जाना मैंने अक्षर को जब,

पढ़ने लगा धड़ल्ले से तब।

जाना मैंने ए, बी, सी,

पढ़ने लगा अंग्रेजी भी।।


खेल-खेल में बड़े मजे से,

सीखी मैंने गिनती भी।

पहाड़े, जोड़, घटाने संग,

सीखा मैंने भाग भी।।


करता हूँ खेल-खेल में,

अब तो प्रश्न इबारती भी।

जाना मैंने पेड़-पौधों को

यातायात के साधन भी।।


रिमझिम हो या हो मैरीगोल्ड,

गणित वाटिका या पर्यावरण।

सब का करने लगा हूँ मन्थन,

करता मैं अब इन्हें स्मरण।।


खेलकूद, इंग्लिश स्पेलिंग,

मैथ्स विजार्ड या ड्राइंग।

सब में प्रतिभाग लेता हूँ,

सदा आगे मैं रहता हूँ।।


कुछ शरारत अभी भी जारी,

क्योंकि मैं अभी छोटा बच्चा हूँ।

मेरे भी कुछ अपने सपने हैं,

मैं मन से बिल्कुल सच्चा हूँ।।




बनूंँ मैं भी बड़ा महान,

करूँ जग में अपना नाम।

पर अभी बहुत पढ़ना है,

तभी तो आगे बढ़ना है।।


जाऊंँगा रोज स्कूल,

रुकने की नहीं करनी है भूल।

बस आगे बढ़ते जाता हूँ,

पर अभी मैं छोटा बच्चा हूँ।।


✍️रचना-

भावना पाण्डे (स०अ०)

रा० प्रा० वि० कठघरिया, 

वि० ख०- हल्द्वानी, नैनीताल

🙏संकलन- 

टीम हिम मन मन्थन उत्तराखण्ड

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