हिन्दी की वैज्ञानिकता- श्रीमती सन्नू नेगी
📝प्राथमिक शिक्षकों की अपनी साहित्यशाला हिम मन मन्थन में हिन्दी दिवस के सुअवसर पर प्रस्तुत है, आज जनपद चमोली से शिक्षिका बहिन श्रीमती सन्नू नेगी जी का आलेख-:
✍️🇮🇳हिन्दी की वैज्ञानिकता
भाषा केवल संवाद का माध्यम नहीं होती, वह चिन्तन का दर्पण भी होती है। हिन्दी इसी दृष्टि से विशिष्ट और वैज्ञानिक है। इसकी वैज्ञानिकता का मूल आधार ध्वनि, व्याकरण और लिपि की सहजता में निहित है। जब हम हिन्दी के स्वरूप को गहराई से देखते हैं तो पाते हैं कि यह केवल भावनाओं की भाषा नहीं, बल्कि विचारों के अनुशासन की भाषा भी है।
हिन्दी की लिपि देवनागरी पूर्णतः ध्वन्यात्मक है। जिस प्रकार एक गणितीय सूत्र हर बार समान परिणाम देता है, उसी प्रकार हिन्दी का हर अक्षर अपनी स्थिर ध्वनि के साथ उच्चारित होता है। यहाँ वर्णमाला का क्रम स्वर से व्यंजन की ओर किसी भी वैज्ञानिक अनुक्रम से कम नहीं। यह क्रम ध्वनियों के उच्चारण स्थलों के आधार पर बना है; अर्थात् जो ध्वनि गले से निकलती है, वह पहले, और जो होंठों पर जाकर पूर्ण होती है, वह बाद में। यह शास्त्रीयता विज्ञान की कसौटी पर खरा उतरती है।
व्याकरण की दृष्टि से भी हिन्दी अत्यंत तर्कसंगत है। वाक्य-विन्यास में कर्ता, क्रिया और कर्म का स्थान सरल नियमों से बंधा है। यही कारण है कि हिन्दी का वाक्य पढ़ते ही अर्थ स्पष्ट हो जाता है, किसी अतिरिक्त अनुमान की आवश्यकता नहीं पड़ती। इसके विपरीत कई भाषाओं में व्याकरणिक जटिलता अर्थ को उलझा देती है।
शब्द-निर्माण की पद्धति भी वैज्ञानिक है। हिन्दी में प्रत्यय और उपसर्ग जोड़कर नए-नए शब्द गढ़े जाते हैं। यह प्रक्रिया उसी प्रकार है जैसे प्रयोगशाला में एक छोटे तत्व से बड़ा यौगिक तैयार किया जाता है। यही कारण है कि हिन्दी अपने शब्द-संसार को लगातार विस्तार देती रहती है।
विज्ञान का सबसे बड़ा गुण है – सार्वभौमिकता। हिन्दी इस गुण को भी आत्मसात किए हुए है। चाहे गणित के सूत्र लिखने हों, भौतिकी के सिद्धान्त समझाने हों या कम्प्यूटर की प्रोग्रामिंग करनी हो, हिन्दी की देवनागरी लिपि उतनी ही सक्षम है। अक्षरों की यह सजीव संरचना डिजिटल युग में भी बखूबी प्रयोग की जा रही है।
हिन्दी की वैज्ञानिकता केवल यांत्रिक नहीं, बल्कि सांस्कृतिक भी है। इसमें ध्वनि और अर्थ का ऐसा सामंजस्य है जो मनुष्य की चेतना को सुव्यवस्थित करता है। जब कोई बालक 'क' से कबूतर पढ़ना सीखता है, तब वह केवल भाषा नहीं सीख रहा होता, बल्कि तार्किक और रचनात्मक सोच का भी अभ्यास कर रहा होता है।
डिजिटल युग में भी इसकी वैज्ञानिकता चमकती है। कम्प्यूटर पर टंकित होते अक्षर हों या रोबोटिक आदेश, हिन्दी की ध्वन्यात्मकता मशीनों को भी समझ में आने लगती है। विज्ञान और हिंदी का यह मेल भविष्य की वह किरण है, जो भारत की चेतना को विश्व तक प्रकाशित करेगी।
अतः यह कहना अतिशयोक्ति नहीं होगी कि हिन्दी विज्ञान की आत्मा को शब्दों में ढालने की क्षमता रखती है। वह भावनाओं की कोमलता के साथ-साथ विवेक की कठोरता को भी समान रूप से संजोए हुए है। हिंदी केवल हृदय की भाषा नहीं, मस्तिष्क की भी भाषा है- और यही उसकी सच्ची वैज्ञानिकता है।
हिन्दी दिवस की हार्दिक बधाई एवं शुभ कामनाएंँ 💐 💐 💐 💐
✍🏻आलेख
सन्नू नेगी (स०अ०)
राजकीय कन्या उच्च प्राथमिक विद्यालय सिदोली
विकास खण्ड- कर्णप्रयाग,
जिला- चमोली, उत्तराखण्ड
🙏संकलन-
टीम हिम मन मन्थन उत्तराखण्ड

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