हिन्दी से रोशन हिन्दुस्तान-श्रीमती अमिता कालरा

 📝प्राथमिक शिक्षकों की अपनी साहित्यशाला हिम मन मन्थन में हिन्दी दिवस के सुअवसर पर प्रस्तुत है, आज जनपद रुद्रप्रयाग से शिक्षिका बहिन श्रीमती अमिता कालरा जी द्वारा रचित कविता-:


✍️🇮🇳हिन्दी से रोशन हिन्दुस्तान


हिन्दी है आत्मा हमारी, 

हिन्दी है पहचान।

इसके बिना अधूरा है, 

भारत का सम्मान।।


मिट्टी की खुशबू है इसमें, 

माँ की मधुर पुकार।

मन के सारे भाव समेटे, 

हर दिल का श्रृंगार।।


यही वो भाषा है जिसमें,

माँ ने गीत सुनाए।

लोरी बनकर अँखियों को,

सपनों की सैर कराए।।


पहली बूँद सी मधुर लगती,

भीनी-भीनी आवाज।

फिर क्यों अपने ही आंँगन में!

घटता इसका अंदाज।।


फिर भी कैसी विडम्बना है!

कैसी ये पहचान!

अंग्रेजी बोल इतराएँगे, 

हिन्दी में अपमान।।



अपनी भाषा बोलने में,

संकोच क्यों है आता।

माँ की बोली भूल के मानव, 

और कहाँ सुख पाता।।


हिन्दी में अन्तर्निहित किस्से, 

पुरखों की ये बात।

संघर्षों की गाथाएँ, 

साहस की सौगात।।


जन-जन की संवेदना, 

कण-कण में विश्वास।

हिन्दी ही तो जोड़ती है, 

दिल से दिल की आस।।


यह भाषा केवल शब्द नहीं, 

जीवन का है गीत।

धरती की लय, ऋतुओं का रंग, 

मन का है संगीत।।


जो इसे अपनाएंँगे , 

जग में मान बढ़ाएंँगे।

हिन्दी से ही विश्व पटल पर, 

परचम नया लहराएँगे।।


आओ! मिलकर प्रण करें हम, 

दीप जलाएंँ हिन्दी का।

मान बढ़ाएंँ जग में जाकर,

गान सुनाएंँ हिन्दी का।।


गौरव हो, सम्मान हो इसका, 

यही हमारा गान।

हिन्दी से रोशन होगा, 

अपना हिन्दुस्तान।।


🙏रचना-: 

अमिता कालरा

रा० प्रा० वि० मुन्नादेवल,

वि० ख०- जखोली,  रुद्रप्रयाग


🙏संकलन- 

टीम हिम मन मन्थन उत्तराखण्ड

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