हिन्दी पहचान हमारी- श्रीमती मंजुलता

 📝प्राथमिक शिक्षकों की अपनी साहित्यशाला हिम मन मन्थन में हिन्दी दिवस के सुअवसर पर प्रस्तुत है, आज जनपद चमोली से शिक्षिका बहिन श्रीमती मंजुलता जी द्वारा रचित कविता-:


✍️🇮🇳हिन्दी पहचान हमारी 



हिन्दी भाषा गर्व हमारी,

हमें इस पर नाज है।

हिन्दी भाषा पहचान हमारी,

यह हमारी शान है।।


हिन्दी हमारी आन है,

हिन्दोस्ता की जान है।

मातृ भाषा ये है हमारी,

भारत की पहचान है।।


उठो धरा के नौ जवानों,

मातृ भूमि पुकारती है।

मातृ भाषा को मान्यता दो,

इसको अपनी पहचान बना दो।।



ये भाषा पहचान हमारी,

प्यार है, स्नेह इसमें।

महसूस इसको कर सको तो,

दिल को इससे जोड़ दो।।



है हमारी शक्ति हिन्दी,

एक सहज अभिव्यक्ति हिन्दी।

अनेकता को एकता में,

बांँधने का सूत्र है हिंदी।।


हिन्दी दिवस की हार्दिक बधाई एवं शुभ कामनाएँ 

📝 रचना-

मंजुलता (स० अ०)

रा० क० उ० प्रा० वि० बौंला 

वि० ख०- कर्णप्रयाग, चमोली।


🙏संकलन- 

टीम हिम मन मन्थन उत्तराखण्ड

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