अपना उत्तराखण्ड- डाॅ० विनीता खाती
📝प्राथमिक शिक्षकों की अपनी साहित्यशाला "हिम मन मन्थन" में उत्तराखण्ड स्थापना दिवस पावन पर्व के परिप्रेक्ष्य में प्रस्तुत है, आज जनपद अल्मोड़ा से शिक्षिका बहिन श्रीमती विनीता खाती जी द्वारा रचित कविता-:
🙏✍️अपना उत्तराखण्ड
धन्य है मेरे उत्तराखण्ड की धरती,
श्रद्धा यहांँ कण-कण में बसती।
देश भक्ति मिट्टी से महकती,
प्रेम भावना हर दिलों में रहती।।
दिव्य पर्वत राज हिमालय,
को धारण करें इसका शीश।
चार धाम यहांँ विराजे,
देते हैं हमको आशीष।।
गंगा, यमुना, सरयू, काली,
से बना इसका आंँचल।
जो सींचे यहांँ की धरती,
देकर पावन शीतल जल।।
रीति-रिवाज परम्पराओं की,
है यहांँ खनक।
कौतिक, मेले, त्योहारों की,
है अजब रौनक।।
सबसे निराली सबसे अनूठी,
संस्कृति है यहांँ की।
नित नए रंगों को लेकर,
सारे जग में महकती।।
केदार खण्ड और मानस खण्ड,
नाम से है भूमि वर्णित।
अति प्राचीन पुराणों में,
महिमा इसकी है लिखित।।
महापुरुषों की है ये जननी,
देवों की पावन भूमि।
मेरा उत्तराखण्ड, मेरी जन्मभूमि,
मेरी कर्म भूमि, मेरी मातृभूमि।।
🙏रचना-:
डॉ० विनीता खाती
राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय गाड़ी
विकास खण्ड- ताड़ीखेत, जनपद- अल्मोड़ा
🙏संकलन- टीम हिम मन मन्थन उत्तराखण्ड

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