बाल मन - डाॅ० विनीता खाती
📝प्राथमिक शिक्षकों की अपनी साहित्यशाला "हिम मन मन्थन" में बाल दिवस के परिप्रेक्ष्य में प्रस्तुत है, आज जनपद अल्मोड़ा से शिक्षिका बहिन डाॅ० विनीता खाती द्वारा रचित कविता-:
🙏✍️🌹बाल मन
तुम्हारा फूलों सा ये मन,
तुम्हारा नाजुक सा ये मन।
पल भर में मुरझा जाता है,
कुछ पल में फिर खिल जाता है।।
कभी अकड़ कर गुस्सा दिखाते,
कभी झगड़ कर बातें मनाते।
पल-पल में तुम रूठ जाते हो,
फिर जल्दी मान भी जाते हो।।
घर का खाना तुम्हें न भाता,
बाहर का खाना बहुत सुहाता।
ऑर्डर पर जो आ जाता,
वहीं तुम्हें बहुत लुभाता।।
कितनी सुन्दर तुम्हारी दुनिया!
खुशी, मौज, मस्ती की पुड़िया।
खेल-मेल में तुम हो रमते रहते,
तुम्हें घुमाये समय का पहिया।।
हर रोज मांगें तुम्हारी बढ़ती,
जब वो पूरी नहीं हो पाती।
तब तक याद मांँ तुमको आती,
मांँ सब कुछ पूरा कर जाती।।
🙏रचना-:
डॉ० विनीता खाती (स०अ०)
राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय गाड़ी,
विकास खण्ड- ताड़ीखेत, अल्मोड़ा
🙏संकलन- टीम हिम मन मन्थन उत्तराखण्ड

बहुत सुंदर रचना 🌹🙏
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