अपना उत्तराखण्ड- श्रीमती पुष्पा बहुगुणा जी

 📝प्राथमिक शिक्षकों की अपनी साहित्यशाला  "हिम मन मन्थन" में उत्तराखण्ड स्थापना दिवस के परिप्रेक्ष्य में प्रस्तुत है, आज  जनपद टिहरी गढ़वाल से शिक्षिका बहिन श्रीमती पुष्पा बहुगुणा जी द्वारा रचित कविता-:


🙏✍️अपना उत्तराखण्ड


पच्चीस बसन्तों का सफर सुहाना,

वीरों की धरती देवों का ठिकाना।

गूँज उठे फिर वीर गाथाएँ सारी,

जय हो तुम्हारी! जय हो तुम्हारी!


तुमसे ही फूले फागुन के रंग,

तुमसे ही महके हर इक अंग।

गंगोत्री की धारा पावन है,

केदार धाम तुम्हारा सावन है।।


नैनी झील की झिलमिल झाँकी,

मुनि की रेती फूलों की वादी।

हर शिखर गगन से करता संवाद,

'जय उत्तराखण्ड' अमर है नाद।।


शौर्य, संस्कृति, शालीनता का मान,

स्त्री-पुरुष दोनों में अद्भुत सम्मान।

गाँव-गाँव में शिक्षा की ज्योति,

मेहनत, ममत्व, मातृभूमि की भक्ति।।


रजत जयन्ती पर प्रण ये लेंगे,

विकास की राह स्वयं चुनेंगे।

न भ्रष्टता, न भेदभाव की छाया,

देव भूमि का गौरव सदा लहराया।।



चलो फिर गाएँ मिलकर आज,

उत्तराखण्ड तेरा उज्ज्वल साज।

जय-जय उत्तराखण्ड कहें गर्व से!

तेरे पुत्र-पुत्री कहें गदगद स्वर से।।


🙏रचना-:

पुष्पा बहुगुणा (प्र०अ०) 

 रा० उ० प्रा० वि० पिपोला (उठड़)

 वि० ख०- जाखणीधार, टिहरी गढ़वाल



🙏संकलन- टीम हिम मन मन्थन उत्तराखण्ड

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