नव वर्ष 2026- श्रीमती सुशीला थपलियाल

📝प्राथमिक शिक्षकों की अपनी साहित्यशाला  "हिम मन मन्थन" में आँग्ल नव वर्ष  के परिप्रेक्ष्य में प्रस्तुत है, आज  जनपद रुद्रप्रयाग गढ़वाल से शिक्षिका बहिन श्रीमती सुशीला थपलियाल जी द्वारा रचित कविता-:


🙏✍️नव वर्ष 2026


नव वर्ष तुम्हारे स्वागत में, 

खुशियों की हर इक चाहत में।

कामना यही प्रथम प्रभात, 

हर इक को मिले सुन्दर सौगात।।


  

सबके लिए हो मंगलमय, 

नये साल का इक-इक पल। 

निर्बाध, स्वर्णिम और सुखद हो, 

ना कपट हो, ना हो कहि छल।।

 

 

नव जोश और नवीन उल्लास, 

धुति फैले चहुँ दिशा हो खास।

नैतिकता के मूल्य सब गढे़, 

मुफलिसी में ना कोई रहे।।



 

नववर्ष हर पल हो नवल, 

शुभ चिन्तन नवीन हो पहल।

जो सुलझ सकी ना विगत वर्ष में, 

अब उस उलझन का भी हो हल।। 

 

सतपथ, सत्कर्म का हो प्रकाश, 

असहिष्णुता, आत्ममोह का हो विनाश। 

नव भावों, विचारों की गंगा बहे, 

खुशियों के फब्बारों से हर दामन सजे।। 

   


🙏रचना-:

 सुशीला थपलियाल (प्र०अ०) 

 रा० प्रा० वि० पपडा़सू 

 वि० ख०- जखोली, रुद्रप्रयाग





🙏संकलन- टीम हिम मन मन्थन उत्तराखण्ड

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