गौतम बुद्ध
📝प्राथमिक शिक्षकों की अपनी साहित्यशाला "हिम मन मन्थन"में 'बुध पूर्णिमा' पावन पर्व के सुअवसर पर प्रस्तुत है, स्वरचित कविता -:
🙏✍️ बुद्ध अवतार
जब यज्ञों में बढ़ी थी हिंसा,
धर्म हुआ था कहीं लुप्त सा।
वेदों का अर्थ हुआ विकृत,
मानव बन बैठा था कठोर सा।।
तब करुणा का दीप जलाकर,
धरती पर अवतार हुआ।
विष्णु ने बुद्ध बन आकर,
सत्य का फिर विस्तार किया।।
राजा शुद्धोधन के घर जन्मे,
माता माया देवी की छाया में।
गौतम बुद्ध ने लुंबिनी धाम में,
जन्म लिया इस पावन माया में।।
लुम्बिनी की पावन भूमि पर,
ज्ञान का प्रथम उजियारा छाया।
सिद्धार्थ से बुद्ध बने जब,
जग ने सत्य का पथ अपनाया।।
न शस्त्र उठाए, न युद्ध किया,
अहिंसा का संदेश दिया।
प्रेम, दया और शान्ति से ही,
जीवन का सच्चा मार्ग दिखा दिया।।
गौतम बुद्ध के रूप में आकर,
मोह-माया का जाल हटाया,
असुरों को भी सत्य की राह पर,
धीरे-धीरे फिर से लाया।।
जहाँ थी क्रूरता की छाया,
वहाँ करुणा का फूल खिला।
अज्ञान के अंधकार में,
ज्ञान का दीपक फिर जला।।
यह अवतार सिखाता हमको,
क्रोध नहीं, बस प्रेम अपनाओ।
धैर्य, दया और सत्य के पथ पर,
जीवन को उज्ज्वल बनाओ।।
सत्य, अहिंसा का अमृत देकर,
जीवन का मर्म समझाया।
लोभ, मोह और तृष्णा त्यागो,
मध्यम मार्ग अपनाया।।
करुणा, मैत्री, मुदिता, उपेक्षा,
चार भाव का ज्ञान दिया।
दु:ख के कारण और निवृत्ति का,
सत्य जगत को बोध दिया।।
🙏 रचना-:
माधव सिंह नेगी
प्रधानाध्यापक
रा० प्रा० वि० जैली,
विकास खण्ड- जखोली, रुद्रप्रयाग
🙏संकलन- टीम हिम मन मन्थन उत्तराखण्ड

टिप्पणियाँ
एक टिप्पणी भेजें